लुधियाना का साईकिल उद्योग……..खो रहा है - डॉ. कृष्ण स्वरूप आनन्दी

सस्ते आयात के कारण देश के औद्योगिक नगरों का अवसान हो रहा है, अनौद्योगीकरण की आत्मघाती प्रक्रिया चालू हो गयी है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर बेरोजगारी, विस्थापन और बदहाली फैल रही है।
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साईकिल उद्योग की तरह ही, लुधियाना सिलाई मशीन उद्योग का भी पिछले 100 वर्षों से केन्द्र रहा है। देश की कुल सिलाई मशीन निर्माण का 75 प्रतिशत कारोबार लुधियाना में ही होता है। यह देश का सबसे बड़ा सिलाई मशीन उत्पादन केन्द्र है। परन्तु अब यह चीनी सिलाई मशीनों और उनके कल-पुर्र्जों, जो भारतीय मशीनों और कलपुर्जों से 40 से 60 प्रतिशत तक सस्ते हैं, के मुकाबले बाजार में पिछड़ रहा है। अब बड़ी रेडीमेड वस्त्र निर्माण कम्पनियों के सिलाई केन्द्रों में भी लुधियाना की बनी मशीनों के स्थान पर जगुआर, जुलसी, पैगासस् आदि नामों की आयातित सिलाई मशीनें इस्तेमाल की जा रही हैं। कढ़ाई मशीनों का भी 60 प्रतिशत बाजार चीनी कढ़ाई मशीनों के कब्जे में आ चुका है। सियुविंग मशीन डीलर्स एण्ड एसेम्बलर्स एसोसियेशन के प्रेसीडेंट वरिन्दर रखेजा के मुताबिक ''भारतीय बाजार में चीन की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है,क्योंकि सिलाई मशीनों में इस्तेमाल होने वाली सुई, सुई प्लेट, बाबिन्स और बाबिन केस जैसे जरूरी 95 प्रतिशत तक चीन से आयातित कल-पुर्जे ही इस्तेमाल हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण इनके मूल्य में भारी अन्तर होना है।'' ...........पूरा पढ़ें

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